Chatra Police Officer Suspension: दारोगा दंपति के घर से नाबालिग बरामद, दोनों निलंबित

चतरा में दारोगा दंपति के सरकारी आवास से नाबालिग बच्ची रेस्क्यू

चतरा: Chatra Police Officer Suspension मामले में पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी ने महिला थाना प्रभारी पुलिस अवर निरीक्षक फिरदौस नाज और सदर थाना में पदस्थापित उनके पति पुलिस अवर निरीक्षक टीपू अंसारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों पर नाबालिग बच्ची से कथित तौर पर घरेलू काम कराने, मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगे हैं। बाल कल्याण समिति की शिकायत और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सन्नी वर्धन की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

निलंबन के दौरान दोनों अधिकारियों को पुलिस लाइन में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही मामले में विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

सरकारी आवास में छापेमारी कर नाबालिग का रेस्क्यू

मामला रविवार को उस समय सामने आया, जब बाल कल्याण समिति की विशेष टीम को दारोगा दंपति के सरकारी आवास में एक नाबालिग बच्ची के रहने की सूचना मिली। गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने बाल कल्याण समिति की सदस्य सह बेंच ऑफ मजिस्ट्रेट प्रियंका अधिकारी के नेतृत्व में सदर थाना परिसर स्थित संयुक्त सरकारी आवास पर छापेमारी की।

छापेमारी के दौरान टीम ने वहां से नाबालिग बच्ची को बरामद कर उसका रेस्क्यू किया। टीम के अनुसार, बच्ची के चेहरे पर चोट के निशान भी पाए गए। प्रारंभिक जानकारी में आरोप है कि नाबालिग से सरकारी आवास में घरेलू काम कराया जा रहा था।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बच्ची को तत्काल संरक्षण में लिया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

बच्ची ने मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए

रेस्क्यू के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष बच्ची का बयान दर्ज कराया गया। बताया जा रहा है कि बच्ची ने महिला थाना प्रभारी फिरदौस नाज और उनके पति टीपू अंसारी पर उसके साथ मारपीट और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं।

हालांकि, बच्ची द्वारा लगाए गए आरोपों की पूरी सच्चाई जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस एवं संबंधित विभाग द्वारा मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

मेडिकल जांच के बाद बाल संरक्षण गृह भेजी गई बच्ची

रेस्क्यू की गई नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके अलावा बेंच ऑफ मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान भी दर्ज कराया गया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्ची को बाल संरक्षण गृह (सीसीआई) भेज दिया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, बच्ची की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू

मामले में दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एसडीपीओ सन्नी वर्धन ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए बाल कल्याण समिति की ओर से पत्र प्राप्त हुआ है।

इसके बाद सदर थाना प्रभारी को मामला दर्ज कर विधि-सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एसपी ने कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं

चतरा एसपी अनिमेष नैथानी ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि नाबालिग से बाल मजदूरी कराना अथवा उसके साथ किसी भी तरह की मारपीट और प्रताड़ना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है। पुलिस विभाग में कार्यरत होने के बावजूद यदि कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। एसपी के निर्देश के बाद दोनों पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया है और विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

जांच के घेरे में कई सवाल

मामले के सामने आने के बाद कई सवाल भी खड़े हुए हैं। नाबालिग बच्ची दारोगा दंपति के सरकारी आवास में कब से रह रही थी, वह वहां किन परिस्थितियों में पहुंची, उससे कितने समय से घरेलू काम कराया जा रहा था और उसके चेहरे पर चोट कैसे आई—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

इसके अलावा बच्ची की उम्र और उसे सरकारी आवास में रखने की परिस्थितियां भी जांच का विषय हैं। इन सवालों का जवाब बच्ची के बयान, जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सामने आएगा।

फिलहाल दोनों पुलिस अधिकारियों के निलंबन, नाबालिग के रेस्क्यू और प्राथमिकी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद मामला जांच के दौर में है। दोष और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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