Mango Municipal Corporation: नगर निगम की बैठक, एजेंडा और महापौर के अधिकार से जुड़े 4 अहम सवाल

नगर निगम की बैठक, कार्यसूची और महापौर के अधिकार से जुड़े चार अहम सवाल

जमशेदपुर: Mango Municipal Corporation की कार्यप्रणाली में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका, अधिकार तथा जिम्मेदारियां स्पष्ट होना जरूरी है। स्थानीय शासन की व्यवस्था तभी प्रभावी और जवाबदेह बन सकती है, जब सभी संबंधित पक्ष अपने अधिकारों और दायित्वों की सीमा को समझें। नगर निगम केवल नागरिक सुविधाओं के प्रबंधन तक सीमित व्यवस्था नहीं है, बल्कि स्थानीय लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शहर के विकास और स्थानीय प्रशासन से जुड़े निर्णयों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। किसी पद पर निर्वाचित होने मात्र से संबंधित व्यक्ति को हर प्रकार का प्रशासनिक या वित्तीय निर्णय लेने का अधिकार नहीं मिल जाता। प्रत्येक अधिकार के साथ उसकी प्रक्रिया, जिम्मेदारी और सीमा भी निर्धारित होती है। इसलिए पदाधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र के साथ-साथ उससे जुड़ी जिम्मेदारियों की भी जानकारी होनी चाहिए।

नगर निगम की बैठकों और निर्णयों में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। निर्णय लेने की प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह होगी तो इससे स्थानीय प्रशासन में विश्वास बढ़ेगा और नागरिकों के हित में बेहतर काम किया जा सकेगा।

महापौर, उपमहापौर, पार्षद, नगर आयुक्त तथा अन्य पदाधिकारियों की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं। इनके बीच अधिकारों और जिम्मेदारियों का संतुलन तथा आपसी समन्वय स्थानीय शासन की सफलता के लिए जरूरी है। नगर निगम से जुड़े विषयों पर किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले संबंधित नियमों और वैधानिक प्रावधानों को देखना चाहिए। अधिकारों की जानकारी के साथ उनकी सीमाओं को समझना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उतना ही आवश्यक है।

CROW News आज आपको उन तथ्यों के बारे में विस्तार से जानकारी देगा, जो आपको ही नहीं बल्कि नगर निगम से जुड़े हर किसी को समझना चाहिए। इसे चंद सवालों के आईने में देखना समीचीन होगा। ध्यान रहे, इन सवालों के जो जवाब हैं, वो परामर्श के तौर पर हैं और विधि-विशेषज्ञों तथा सरकारी अफसरों ने दिये हैं।

पहला सवाल: नगरपालिका पार्षदों की बैठक का प्रस्ताव कौन कर सकता है और बैठक कौन बुला सकता है?

इसका जवाब है नगरपालिका अधिनियम के अनुसार सामान्य बैठकों को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में समझा जा सकता है—अनिवार्य सामान्य बैठक और आवश्यकता के आधार पर बुलाई जाने वाली बैठक। मासिक सामान्य बैठक आयोजित करना अधिनियम की धारा 74(1) के तहत अनिवार्य है। वहीं, धारा 74(2) के अनुसार आवश्यकता-आधारित बैठक महापौर/अध्यक्ष द्वारा बुलाई जा सकती है, बशर्ते कुल पार्षदों के कम-से-कम एक-पांचवें सदस्यों द्वारा लिखित रूप से इसकी मांग की गई हो। इसके लिए धारा 75 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। सामान्य बैठक बुलाने की जिम्मेदारी नगरपालिका सचिव की है। सभी पार्षदों, अध्यक्ष/महापौर को कम-से-कम 72 घंटे पूर्व बैठक की सूचना देना आवश्यक है। सूचना के साथ बैठक में विचार किए जाने वाले विषयों की कार्यसूची भी भेजी जानी चाहिए। बैठक की कार्यवाही पर उस अधिकारी के हस्ताक्षर आवश्यक हैं जिसने बैठक की अध्यक्षता की हो। यह अधिकारी महापौर/अध्यक्ष, उपमहापौर/उपाध्यक्ष या परिस्थितियों के अनुसार पार्षदों द्वारा चुना गया पीठासीन अधिकारी हो सकता है।

दूसरा सवाल: बैठक की कार्यसूची कौन तैयार करेगा?

इसका जवाब है, अधिनियम में कार्यसूची तैयार करने के संबंध में कोई अलग और स्पष्ट प्रावधान नहीं है। हालांकि, अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को समग्र रूप से पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि सामान्य बैठक की सूचना और कार्यसूची तैयार करने तथा उसे पार्षदों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नगरपालिका सचिव की है। धारा 75 में बैठक बुलाने और उसकी सूचना देने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, पार्षदों को नगरपालिका के कामकाज से संबंधित प्रश्न उठाने, अत्यावश्यक सार्वजनिक विषयों पर चर्चा की मांग करने तथा स्थायी समिति से जानकारी मांगने के लिए भी नगरपालिका सचिव को लिखित सूचना देने का प्रावधान है। उम्मीद की जाती है कि झारखंड के हर नगर निगम में इस प्रक्रिया का अनुपालन सुनिश्चित किया जाता होगा।

तीसरा सवाल: कार्यसूची तैयार करने में महापौर/अध्यक्ष की क्या भूमिका होती है?

इसका जवाब है कि सामान्य बैठक की कार्यसूची तैयार करने में महापौर/अध्यक्ष की प्रत्यक्ष भूमिका अधिनियम में निर्धारित नहीं है। अर्थात, ये सीधे-सीधे किसी भूमिका में नहीं होते। धारा 75 के अनुसार, बैठक बुलाने और उसकी कार्यसूची पार्षदों तक पहुंचाने का दायित्व नगरपालिका सचिव का होता है। पार्षदों को प्रश्न पूछने, अत्यावश्यक सार्वजनिक विषय उठाने तथा स्थायी समिति से जानकारी मांगने के लिए भी नगरपालिका सचिव को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचना देनी होती है। सामान्य बैठक के मामले में कार्यसूची तैयार करने की वैधानिक प्रक्रिया नगरपालिका सचिव के माध्यम से संचालित होती है।

चौथा और अहम सवाल: क्या महापौर/अध्यक्ष कार्यसूची को स्वयं तैयार या उसमें संशोधन कर सकते हैं?

इसका जवाब है, धारा 75 के अनुसार सामान्य बैठक नगरपालिका सचिव द्वारा बुलाई जाती है और बैठक की कार्यसूची की सूचना सभी संबंधित सदस्यों को दी जाती है। धारा 76 के तहत महापौर/अध्यक्ष को किसी बैठक में आकस्मिक अथवा अत्यावश्यक कार्य को शामिल करने या उसे अस्वीकार करने की शक्ति प्राप्त है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे सामान्य कार्यसूची में अपनी इच्छा से संशोधन कर सकते हैं या किसी पार्षद द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत प्रस्ताव को स्वयं बदल सकते हैं। आकस्मिक कार्य को छोड़कर महापौर/अध्यक्ष के पास सामान्य कार्यसूची में मनमाने ढंग से संशोधन करने या किसी विषय को रोकने की शक्ति अधिनियम से स्पष्ट रूप से प्राप्त नहीं होती।

(स्रोत: नगर विकास एवं आवास विभाग)

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