‘वीणा रानी पवन स्मृति सम्मान समारोह’ में साहित्य, कला और संस्कृति का भव्य संगम, रचनाकारों व कलाकारों का हुआ सम्मान
जमशेदपुर: बहुभाषीय साहित्यिक संस्था ‘सहयोग’ एवं विद्यादीप फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘वीणा रानी पवन स्मृति सम्मान समारोह’ साहित्य, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, नृत्य और रंगमंच का एक यादगार उत्सव बन गया। 1 अगस्त को आयोजित इस भव्य समारोह में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक रचनाकारों, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक हस्तियों को विभिन्न सम्मानों से अलंकृत किया गया। कार्यक्रम ने दिवंगत साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. वीणा रानी की स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए नई पीढ़ी को भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रेरक संदेश दिया।
📌 मुख्य बातें
- सहयोग एवं विद्यादीप फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘वीणा रानी पवन स्मृति सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन।
- साहित्य, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, नृत्य और रंगमंच से जुड़े रचनाकारों एवं कलाकारों को विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया।
- मुख्य अतिथि सरयू राय एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा ने साहित्य और संस्कृति संरक्षण पर अपने विचार रखे।
- ‘वैदुष्यमणि डॉ. वीणा रानी सम्मान’ और ‘डॉ. वीणा रानी प्रभा सम्मान’ सहित कई सम्मान प्रदान किए गए।
- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कृति ‘उर्वशी’ पर आधारित नृत्य-नाटिका कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही।
सहयोग गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ समारोह का शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ डॉ. पद्मा झा द्वारा प्रस्तुत ‘सहयोग गीत’ से हुआ। इसके उपरांत डी.बी.एम.एस. कॉलेज फॉर एजुकेशन की छात्राओं ने ‘पंचतत्व’ विषय पर आधारित आकर्षक नृत्य प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रस्तुति का निर्देशन पामेला घोष दत्ता ने किया, जबकि सुमेधा दत्ता, तृषा सरकार, आकांक्षा दास, मौमिता चक्रवर्ती एवं सुप्रीति दास ने अपनी सशक्त अभिव्यक्ति से प्रकृति के पांच तत्वों की कलात्मक व्याख्या प्रस्तुत की।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ औपचारिक उद्घाटन
दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती तथा ‘अम्मा’ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। मंच पर उपस्थित अतिथियों का संस्था की ओर से अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मान किया गया। उपासना सिन्हा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
साहित्य एवं संस्कृति संरक्षण पर वक्ताओं ने रखे विचार
संस्था की अध्यक्ष डॉ. संध्या सिन्हा ने स्वागत भाषण में ‘सहयोग’ की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए संस्था की सामाजिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। अम्मा की शिष्या डॉ. अनिता राकेश ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर डॉ. अनिता राकेश एवं संस्था की सचिव डॉ. भारती कुमारी द्वारा ‘सहयोग निधि सम्मान’ प्रदान किया गया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा ने अपने संबोधन में साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण समाज की संवेदनशीलता और मूल्यों को जीवित रखता है। इसके पश्चात डॉ. जूही समर्पिता के सहयोग से ‘साहित्य सृजन सम्मान’ प्रदान किया गया।
सरयू राय ने साहित्य और कला की भूमिका पर रखा पक्ष
मुख्य अतिथि पश्चिमी सिंहभूम के विधायक सरयू राय ने अपने प्रेरक उद्बोधन में साहित्य और कला को समाज की संवेदनशील चेतना का आधार बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में रचनात्मकता, संवाद और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाते हैं।
विभिन्न सम्मानों से विभूतियों को किया गया सम्मानित
समारोह का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण ‘वैदुष्यमणि डॉ. वीणा रानी सम्मान’ रहा, जिसे मुख्य अतिथि सरयू राय एवं परिजात सौरभ ने संयुक्त रूप से प्रदान किया। वहीं ‘डॉ. वीणा रानी ‘प्रभा’ सम्मान’ विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा एवं परिजात सौरभ द्वारा प्रदान किया गया। सम्मान समारोह के उपरांत अतिथियों ने दर्शन दीर्घा में स्थान ग्रहण कर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अवलोकन किया।
‘उर्वशी’ नृत्य-नाटिका बनी समारोह का मुख्य आकर्षण
सांस्कृतिक सत्र में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कालजयी कृति ‘उर्वशी’ पर आधारित भव्य नृत्य-नाटिका ने कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया। प्रस्तुति का परिचय डॉ. रागिनी भूषण ने दिया। नृत्य-नाटिका की पटकथा एवं संवाद लेखन डॉ. रागिनी भूषण, गीत एवं पृष्ठभूमि संगीत मसूर सिद्दीकी, नाट्य निर्देशन अवतार सिंह तथा नृत्य निर्देशन सुधा दीप ने किया।
जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने उत्कृष्ट अभिनय एवं मनमोहक नृत्य के माध्यम से ‘उर्वशी’ के भावलोक को सजीव कर दिया। प्रमुख भूमिकाओं में निवेदिता महापात्र ने उर्वशी, शिवम कुमार सिंह ने राजा पुरुरवा, अदिति झा ने चित्रलेखा, अर्पिता डे ने रानी औशिनरी, श्रुति शर्मा ने कंचुकी, आराध्या चंद्र ने सुकन्या तथा समरजीत गुप्ता ने आयु की प्रभावशाली भूमिका निभाई। अप्सराओं की भूमिका में सिमरन झा, चिनापानी तमन्ना रेड्डी, मान्विका कीर्तिश्री, अनुष्का गुप्ता, परिधि पंडित, आद्या झा, परी महतो एवं अन्वेषा महतो ने सामूहिक नृत्य से दर्शकों की भरपूर सराहना अर्जित की।
कलाकारों का सम्मान और राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
नृत्य-नाटिका की प्रस्तुति के उपरांत सभी कलाकारों, नृत्यांगनाओं एवं निर्देशकों को मुख्य अतिथि सरयू राय, विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा, सम्मानित अतिथि डॉ. अनिता राकेश एवं परिजात सौरभ द्वारा सम्मानित किया गया। संस्था की अध्यक्ष डॉ. संध्या सिन्हा एवं सचिव डॉ. भारती कुमारी ने भी सम्मान समारोह में सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के अंत में संस्था की सचिव डॉ. भारती कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, सम्मानित व्यक्तित्वों, कलाकारों, निर्देशकों, सहयोगियों एवं उपस्थित दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का गरिमामय समापन हुआ।
‘वीणा रानी पवन स्मृति सम्मान समारोह’ ने यह सिद्ध किया कि साहित्य, कला और संस्कृति केवल अभिव्यक्ति के माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशील, संस्कारित और सृजनशील बनाने वाली सशक्त धारा हैं। आयोजन ने डॉ. वीणा रानी की स्मृतियों को चिरस्थायी सम्मान देने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल प्रस्तुत की।